आसनसोल। मां काली हावड़ा
मालदा टाउन इंटरसिटी एक्सप्रेस में सवार होकर कालना से मुर्शिदाबाद पहुंची। ताकि उनके
श्रद्धालू उनकी पूजा कर सके। ट्रेन में सवार होते समय मां काली अपने परंपरागत स्वरूप
में थी। वह भगवान शिव की छाती पर सवार और हाथ में कटार लिए खड़ी थी। विदाई देने के
लिए दर्जनों लोग स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे। शांति बनाये रखने के लिए रेलवे
की सुरक्षा एजेंसी जीआरपी, आरपीएफ कर्मी भी तैनात थे। शांतिपुर के श्यामचांदपाड़ा के
निवासी मूर्ति शिल्पकार शुभजीत दे ने इसका निर्माण किया है। मुर्शिदाबाद जिले के नीमतीता
में अयनांशु की पारिवारिक काली पूजा होती है। सोशल मीडिया के माध्यम से शुभजीत दे से
आयोजकों का संपर्क हुआ। शुभजीत की कला से वे काफी प्रभावित हुए। बातचीत के बाद मूर्ति
बनाने का ऑर्डर दे दिया गया। बीते दो माह में मूर्ति का निर्माण हुआ। कालना स्टेशन
से इंटरसिटी एक्सप्रेस से उन्हें मुर्शिदाबाद जाना था। ट्रेन के आने तक मां काली की
मूर्ति प्लेटफॉर्म पर रखी गई थी। कई रेल यात्री छोटे-छोटे कदमों से आगे आए। कुछ ने
उत्सुकता भरी नज़रों से देखा, तो कुछ ने हाथ जोड़कर काली मूर्ति को प्रणाम किया। पुलिस
और रेलवे कर्मचारी खड़े होकर पूरी गतिविधि पर नज़र रखे हुए थे। ट्रेन में चढ़ने में
कोई अधिक परेशआनी नहीं हुई। कई यात्री दरवाज़े के सामने जगह बनाते हुए कह रहे थे,
"मां आ रही हैं, मां आ रही हैं।" थोड़ी ही देर में ट्रेन चालक ने सीटी बजाई,
इंटरसिटी ट्रेन मुर्शिदाबाद के लिए रवाना हो गई।
ব্রেকিং নিউজ
हावड़ा मालदा टाउन इंटरसिटी एक्सप्रेस से कालना से मुर्शिदाबाद रवाना हुई मां काली
हावड़ा-मालदा टाउन इंटरसिटी एक्सप्रेस के जरिए कालना से मुर्शिदाबाद के लिए मां काली की भव्य मूर्ति रवाना की गई, जिसका निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार शुभजीत दे ने किया है। ट्रेन में सवार होने के दौरान श्रद्धालुओं और यात्रियों में भारी उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने हाथ जोड़कर देवी का आशीर्वाद लिया। इस अनूठी यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का एक अनूठा उदाहरण है।

ट्रेन में सवार होती मां काली की मूर्ति|Arthik Dhara Photo
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