सिउड़ी
(वीरभूम)। कोजागरी लक्ष्मी पूजा
के दिन तारापीठ में मां तारा को गर्भगृह में वापस लाया जायेगा। पहले महालया और बाद
में षष्ठी को वापस लाने का प्लान था। लेकिन मुख्य मंदिर का काम पूरा नहीं होने की वजह
से यह मुमकिन नहीं हो पाया। मंदिर कमिटी के अनुसार कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन शाम
ढलने के बाद मां तारा विराजमान होंगी। उनकी पूजा राजराजेश्वरी के रूप में की जाएगी।
मंदिर के फाउंडर जगन्नाथ राय के वंशजों ने इस पर सहमति जताई है। 1.5 करोड़ रुपये की
लागत से गर्भगृह का रेनोवेशन किया जा रहा है। नई वेदी पर देवी को स्थापित करने से पहले
शुद्धिकरण समेत ज़रूरी धार्मिक अनुष्ठान पूरे किये जायेंगे। मां तारा को 'राजराजेश्वरी'
के रूप में सजाया जाएगा और महालक्ष्मी के रूप में पूजा जाएगा। सुबह-सुबह देवी को शिव
मंदिर से विश्राम स्थल पर लाया जाएगा। दिन भर पूजा और दर्शन के बाद शाम की प्रार्थना
के बाद उन्हें मुख्य गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। मां तारा अगली चतुर्दशी के दिन
सुबह शिव मंदिर से बाहर विश्राम स्थल पर आएंगी। वह 25 अक्तूबर को पूरे दिन बाहर रहेंगी।
उस दिन शाम की पूजा के बाद मां तारा को उनके अपने निवास में ले जाया जाएगा।
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कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन तारापीठ में मां तारा लौटेंगी गर्भगृह में
वीरभूम के प्रसिद्ध तारापीठ में 1.5 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे गर्भगृह के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा होने के बाद, कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन मां तारा को उनके मूल गर्भगृह में वापस स्थापित किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर देवी को राजराजेश्वरी रूप में सजाकर महालक्ष्मी के रूप में पूजा जाएगा, जिसपर मंदिर समिति और संस्थापक के वंशजों ने पूर्ण सहमति जताई है। इस धार्मिक आयोजन से स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मंदिर में मां तारा की मूर्ति|Arthik Dhara Photo
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