आसनसोल। बाराबनी ब्लॉक
के पानुरिया पंचायत के गौरांडी, दिघल पहाड़ी और दसकेरी इलाकों में खुली कोयला खदानें
विकसित की जायेंगी। इसके लिए वन विभाग की जमीन पर लगे 4500 पेड़ों की कटाई अगले माह
से शुरू हो जायेगी। वन विभाग ने यह जमीन वेस्ट बंगाल स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
को सौंप दी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए वीरभूम जिले की जमीन पर पेड़ लगाने का निर्णय
लिया गया है। आसनसोल-दुर्गापुर इंडस्ट्रियल एरिया में सक्रिय पर्यावरण प्रेमियों ने
पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जंगलों को खत्म करके माइनिंग की जा
रही है। इसलिए, पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए आसनसोल महकमा में ही नए जंगल बनाए
जाने चाहिए। कोयला खदान बनाने के लिए दिघल पहाड़ी में करीब 115 हेक्टेयर जंगल के पेड़
काटे जायेंगे। दुर्गापुर DFO अनुपम खान के अनुसार जंगल का इलाका मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
को सौंप दिया है। बदले में नया जंगल बनाने के लिए ज़मीन मिली है। खदान बनाने के लिए
4500 पेड़ काटने पड़ेंगे। नये जंगल के लिए बीरभूम ज़िले में 100 एकड़ और पश्चिम बर्दवान
ज़िले में 15 हेक्टेयर ज़मीन मिली है। पश्चिम बंगाल विज्ञान मंच के जिला एडिटोरियल
बोर्ड के सदस्य प्रसून रॉय के अनुसार पश्चिम बर्दवान जिले में जंगल काटे जा रहे हैं।
बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने से लोगों और जंगली जानवरों को नुकसान होगा। इसी जिले
में नए जंगल बनाए जाने चाहिए। इस मांग को लेकर आंदोलन में शामिल होंगे। पर्यावरण कार्यकर्ता
पूर्व प्रोफेसर अरूप घोष सरकारी निर्ण? के पक्ष में हैं। उनके अनुसार किसी भी इलाके
में जंगल काटने से पैदा होने वाला कार्बन सिर्फ उसी जगह तक सीमित नहीं होता। यह हर
जगह फैलता है। इसलिए, किसी भी इलाके में नए जंगल बनाकर ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने की यह पहल
पूरी तरह से साइंटिफिक प्लान है। पश्चिम बर्दवान जिले में जंगल काटकर बीरभूम में नए
जंगल बनाने की सरकार की पहल में कुछ भी गलत नहीं है।

