खड़गपुर। पश्चिमी मेदिनीपुर
जिले के जामबनी थाना अंतर्गत हमीरपुर का निवासी 36 वर्षीय गोपाल पात्र 29 अक्तूबर,
2014 को दुर्घटना का शिकार हो गया। पहले उसे पासकुड़ा अस्पताल में दाखिल कराया गया।
बाद में उसे रेफर कर आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोलकाता में लाया गया। इलाज के
दौरान वह लकवाग्रस्त हो गया। पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी थी। परिजनों ने उसकी सुध
नहीं ली। दोनों पैरों से लाचार गोपाल तब से अस्पताल में ही रह रहा है। उसकी दुनिया
अस्पताल की सर्जरी बिल्डिंग, बेड और व्हीलचेयर तक ही सीमित होकर रह गई है। इस वर्ष
उसके जीवन में कुछ खुशियां दुर्गापूजा के दौरान मिली। 12 साल बाद उसने दुर्गा प्रतिमाएं
देखी। उसे यह मौका दिया हॉस्पिटल के पोस्ट ग्रेजुएट सर्जरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर-स्टूडेंट
त्रिनेश मंडल, गौरीक रॉय, श्रुति सिंह ने। हॉस्पिटल के आसपास के पूजा मंडपों में उसे
ले गये। अस्पताल के कर्मी गौतम ने भी पूरा सहयोग किया। मेडिकल छात्रों के अनुसार गोपाल
12 वर्षों से अस्पताल में है। सहमति बनी कि दुर्गोत्सव के आनंद में उसे भी शामिल किया
जाये। कर के देखिए, ऐसा करना अच्छा लगता है। गोपाल के अनुसार कभी नहीं सोचा था कि वह
दोबारा दुर्गा प्रतिमाएं देख सकेगा। डॉक्टरों ने उसके जीवन में नई खुशियां भर दी हैं।
ब्रेकिंग न्यूज़
12 वर्षों बाद आरजी कर अस्पताल के मरीज ने देखी दुर्गा प्रतिमाएं
पश्चिमी मेदिनीपुर के 36 वर्षीय गोपाल पात्र, जो 12 वर्षों से आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लकवाग्रस्त अवस्था में रह रहे थे, ने इस वर्ष डॉक्टरों के मानवीय प्रयासों से दुर्गा प्रतिमाएं देखीं। अस्पताल के सर्जरी विभाग के छात्रों और कर्मियों की इस पहल ने गोपाल के जीवन में बरसों बाद खुशियां लौटाईं। यह प्रेरणादायक घटना स्वास्थ्यकर्मियों के संवेदनशील पहलू को दर्शाती है और समाज में करुणा का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है।

मेडिकल छात्रों के साथ पैरों से लाचार गोपाल पात्र|Arthik Dhara Photo
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