आसनसोल। लोक कलाओं को आधुनिकतम तकनीक से जोड़ कर उन्हें नई पीढ़ी के
बीच लोकप्रिय बनाने की पहल इस दुर्गापूजा में की गई है। कोलकाता के पूजा पंडालों में
बांकुड़ा के चर्चित टेराकोटा घोड़े हो या पूर्व वर्दवान जिले के नतूनग्राम के उल्लू या
फिर राजा-रानी, सभी रिमोट के एक बटन दबाते ही गतिशील होते दिखेंगे। तीन दशक पहले इसी
कोलकाता शहर के साइंस सिटी में लुप्त डायनासोर को सजीव दिखा बच्चों को चौंकाया गया
था। यह पहल एवरेडी इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने की है। बच्चे लोक कला के स्टाइल में
बने उन मॉडर्न खिलौनों को पा सकते हैं। विदेशी खिलौनों के आकर्षक बाज़ार में बंगाली
लोक कला को नए तरीके से पेश करने के मकसद से ही पारंपरिक टेराकोटा घोड़े, उल्लू या
राजा-रानी की गुड़ियों को रिमोट से चलने वाले खिलौनों का रूप देने की योजना बनाई गई
है। कंपनी के के CEO अनिर्वाण बनर्जी ने कहा कि बंगाली की पारंपरिक लोक कला और हस्तशिल्प
का अपना समृद्ध जीवन और इतिहास है। अल्टिमा बैटरी टेक्नोलॉजी को उन कलाकृतियों के साथ
जोड़कर, न केवल उन्हें सक्रिय कर रहे हैं, बल्कि अपनी परंपरा को नई पीढ़ी के करीब भी
ला रहे हैं। अब तक, बंगाली मिट्टी के घोड़े या उल्लू मुख्य रूप से घर की सजावट के सामान
के रूप में उपयोग में आते हैं। कोलकाता के 95 पल्ली और मुदियाली के पूजा मंडप में ये
खास खिलौने दिखेंगे। जो खास ब्रांड की बैटरी से चलेंगे। हालांकि, वे बाज़ार में बिक्री
के लिए नहीं है। हां, मंडप में हर घंटे आयोजित होने वाले अलग-अलग खेलों और इवेंट्स
में हिस्सा लेकर उन्हें जीता जा सकता है।
ब्रेकिंग न्यूज़
बांकुड़ा के टोराकोटा घोड़े, उल्लू, राजा-रानी थिरकेंगे रिमोट के बटन से
एवरेडी इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने दुर्गा पूजा के अवसर पर बंगाल की पारंपरिक लोक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रिमोट से चलने वाले टेराकोटा घोड़ों और गुड़ियों को पेश किया है। कंपनी के सीईओ अनिर्वाण बनर्जी के अनुसार, इस अनूठी पहल का उद्देश्य अल्टिमा बैटरी तकनीक के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करना और नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाना है। कोलकाता के प्रमुख पूजा पंडालों में होने वाले इन आयोजनों से स्थानीय कला बाजार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति को एक नया व्यावसायिक और तकनीकी आयाम मिल रहा है।

प्रतीकात्मक फोटो |Arthik Dhara Photo
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