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मिठाई की शान बताशा खो गया आधुनिकता की दौड़ में

आधुनिकता और पैकेज्ड मिठाइयों के दौर में कभी मंदिरों और मेलों की शान रहने वाला पारंपरिक 'बताशा' बाजार से धीरे-धीरे गायब होता जा रहा है। सस्ते और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण इस मिष्ठान की मांग घटने से पारंपरिक कारीगरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए यदि धार्मिक आयोजनों में इसे बढ़ावा दिया जाए, तो बताशे की खोई हुई पहचान वापस लौट सकती है।

आर्थिक धारा डेस्क
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22 अक्टूबर 2026 को 10:07 am बजे
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मिठाई की शान बताशा खो गया आधुनिकता की दौड़ में
दुकान में रखे बताशे|Arthik Dhara Photo

आसनसोल। कभी मिठाई की दुकानों की शान, मंदिरों के प्रसाद की पहचान और गांव-कस्बों के मेलों की जान हुआ करता था बताशा। पूजा-पाठ हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान, देवी-देवताओं को भोग लगाने से लेकर प्रसाद बांटने तक बताशे की अपनी खास जगह थी। दशहरा, दुर्गापूजा और दूसरे त्योहारों पर लगने वाले मेलों में बताशे की दुकानें और ठेले सहज ही नजर आ जाते थे। लेकिन आज बदलते समय और आधुनिक मिठाइयों की चमक के बीच सवाल उठने लगा है। आखिर कहां खो गया वह बताशा, जो कभी मिठाई की दुनिया का खास हिस्सा हुआ करता था?

चीनी से तैयार होने वाला यह हल्का-फुल्का मीठा पदार्थ अपनी सादगी के बावजूद लोगों के दिलों में खास जगह रखता था। कम कीमत में मिलने वाला बताशा हर वर्ग की पहुंच में था और धार्मिक परंपराओं के साथ गहराई से जुड़ा हुआ था। समय बदला तो लोगों की पसंद भी बदलने लगी। चॉकलेट, कैंडी, पैक्ड मिठाइयों और आकर्षक डिजाइन वाली नई मिठाइयों ने बाजार में अपनी जगह बनाई। दूसरी ओर, त्योहारों और मेलों का स्वरूप भी बदलता गया। अब पहले की तरह हर जगह बताशे की दुकानें नजर नहीं आतीं। कई स्थानों पर इसकी मांग सीमित होने से पारंपरिक मिठाई बेचने वाले दुकानदारों के सामने भी कारोबार बनाए रखने की चुनौती हो सकती है।

क्या फिर लौट सकती है बताशे की पुरानी पहचान? बदलते दौर में परंपरागत खाद्य पदार्थों को बचाए रखना भी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का एक तरीका है। मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और स्थानीय मेलों में बताशे को उचित स्थान मिले, पारंपरिक मिठाई बनाने वाले कारीगरों को प्रोत्साहन मिले और नई पीढ़ी को इसके महत्व से परिचित कराया जाए, तो इसकी पहचान को नई ऊर्जा मिल सकती है। 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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