Arthik Dhara
अर्थव्यवस्था

ब्रिक्स का नया घोषणापत्र: अमेरिकी नीतियों और आधिपत्य को सीधी चुनौती

ब्रिक्स समूह का नया घोषणापत्र अमेरिकी नीतियों और पश्चिमी आधिपत्य को सीधी चुनौती देता है, जो वैश्विक वित्तीय और भू-राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। आर्थिक प्रतिबंधों, एकतरफा टैरिफ और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर समूह का मुखर रुख ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। यह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कूटनीति पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

आर्थिक धारा डेस्क
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13 सितंबर 2026 को 07:59 am बजे
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ब्रिक्स का नया घोषणापत्र: अमेरिकी नीतियों और आधिपत्य को सीधी चुनौती
The latest BRICS declaration marks a historic shift challenging Western hegemony and shaping a new multipolar world order.|Arthik Dhara Photo

हाल ही में सामने आए ब्रिक्स (BRICS) समूह के घोषणापत्र ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। भले ही इस घोषणापत्र में प्रत्यक्ष रूप से न तो डोनाल्ड ट्रंप का नाम है और न ही संयुक्त राज्य अमेरिका का, फिर भी इसकी अंतर्वस्तु अमेरिकी नीतियों को स्पष्ट रूप से असहज करने वाली है। वैश्विक मंच पर तेजी से उभरते इस आर्थिक और रणनीतिक गठबंधन के रुख ने यह साबित कर दिया है कि अब विकासशील देश पश्चिमी देशों के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।

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विशेष रूप से, आर्थिक प्रतिबंधों, एकतरफा टैरिफ, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी वाले शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर किसी भी प्रकार के हमलों की कड़ी निंदा, और फलस्तीन के समर्थन में दिए गए मुखर बयानों को अमेरिका किसी भी सूरत में अपने अनुकूल नहीं मानेगा। आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकतरफा टैरिफ और सेकेंडरी प्रतिबंधों के जरिए अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करने की जो प्रवृत्ति पश्चिमी देशों द्वारा अपनाई जाती रही है, ब्रिक्स घोषणापत्र ने उस पर कड़ा प्रहार किया है। इसके अलावा, युद्ध के दौरान परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की मांग रूस और ईरान जैसे देशों के संदर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जिन पर लंबे समय से पश्चिमी प्रतिबंधों की मार पड़ी है।

पश्चिम एशिया के मोर्चे पर भी ब्रिक्स का यह रुख अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। गाजा और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों, फलस्तीनियों के आत्मनिर्णय व वापसी के अधिकार तथा नस्लीय एवं धार्मिक भेदभाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ब्रिक्स समूह द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से बदल रहा है। यह समूह अपने रणनीतिक दृष्टिकोण को बहुत ही स्पष्ट तरीके से रख रहा है, जो अमरीकी आधिपत्य को सीधी चुनौती देता है।

विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि इस घोषणापत्र में कूटनीति का परिचय देते हुए किसी भी देश का नाम लेकर सीधे तौर पर आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन इसके निहितार्थों को समझना मुश्किल नहीं है। अमेरिकी टैरिफ नीतियों, रूस व ईरान पर लादे गए एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों के संदर्भ में इस घोषणापत्र के गहरे मायने हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि ब्रिक्स अब बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत कर रहा है, जहां अमेरिकी नीतियों का आंख मूंदकर समर्थन करने के बजाय वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को बुलंद किया जाएगा।

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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