धनबाद: झरिया कोलियरी क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा भूमिगत आग और भू-धंसान से लंबे समय से प्रभावित रहा है। इस विकट स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में झरिया एक्शन प्लान को स्वीकृति दी थी। 7,112 करोड़ रुपये की लागत वाले इस एक्शन प्लान के तहत निर्धारित कार्यों को पूरा करने के लिए 12 साल की समय-सीमा तय की गई थी। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र के लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए झरिया एक्शन प्लान में संशोधन किया गया, जिसे केंद्र सरकार ने जून 2025 में मंजूरी दी।
5,940 करोड़ रुपये के इस संशोधित प्लान को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस संशोधन के बाद झरिया एक्शन प्लान की कुल लागत 7,112 करोड़ रुपये से बढ़कर 13,052 करोड़ रुपये हो गई है।
झरिया एक्शन प्लान के पहले चरण में मुख्य रूप से दो कार्य निर्धारित किए गए थे—पहला, भूमिगत आग (फायर साइट) पर काबू पाना और दूसरा, पुनर्वास योजना के तहत प्रभावित क्षेत्र के लोगों को नए मकानों में शिफ्ट कराना।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1972-73 में झरिया कोलियरी क्षेत्र में आग लगने वाले कुल 77 क्षेत्र थे। कोयले की खदानों में लगी आग को बुझाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आग वाले इलाकों की संख्या घटकर अब केवल सात रह गई है। इस तरह, फायर साइट का दायरा 8.9 वर्ग किलोमीटर से घटकर मात्र 1.8 वर्ग किलोमीटर रह गया है। इन शेष सात इलाकों पर दिसंबर 2027 तक पूरी तरह काबू पाने का लक्ष्य है। इसका मतलब यह है कि दिसंबर 2027 के बाद झरिया कोलियरी क्षेत्र में कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं बचेगा, जहां जमीन के नीचे कोयले में आग सुलग रही हो।
आग और भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए पुनर्वास योजना के तहत 32,049 नए मकानों का निर्माण किया गया है। हालांकि, अब तक केवल 7,334 परिवारों को ही इन मकानों में शिफ्ट कराया जा सका है। केंद्र सरकार का मानना है कि कोलियरी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों की सुगमता के कारण लोग पुनर्वास योजना का लाभ उठाने से कतरा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन द्वारा पुनर्वास स्थलों पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर, अस्पताल और स्कूल जैसी सभी आवश्यक बुनियादी संरचनाएं विकसित की गई हैं।
झरिया कोलियरी क्षेत्र में रहने वाले कुल 1,130 परिवारों ने उस जमीन पर अपना दावा पेश किया था, जहां वे निवास कर रहे हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि इनमें से केवल 172 परिवारों के पास ही जमीन के वैध दस्तावेज हैं, जबकि शेष 958 दावेदारों के पास वैध कागजात नहीं हैं। वैध दस्तावेज वाले परिवारों को एलटीएच (LTH) और बिना दस्तावेज वाले परिवारों को एनएलटीएच (NLTH) श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, संशोधित एक्शन प्लान के तहत दोनों ही श्रेणियों के लोगों को पुनर्वास योजना का समान रूप से लाभ दिया जाना है।
पहले इन दोनों श्रेणियों के लाभुकों को मिलने वाली सुविधाओं में अंतर था, लेकिन अब नियमों को संशोधित कर दिया गया है। बीसीसीएल (BCCL) बोर्ड के निर्णय के अनुसार, अब मकानों की लीज प्रक्रिया के दौरान लाभुकों को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं चुकानी होगी। बीसीसीएल यह जमीन झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (JRDA) को लीज पर देगी, जिसके बाद जेआरडीए द्वारा मामूली शुल्क पर यह मकान लाभुकों को लीज पर दिए जाएंगे।
दिसंबर 2026 तक लोदना और बस्ताकोला क्षेत्र से 3,691 परिवारों को शिफ्ट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शिफ्ट किए जाने वाले इन लक्षित परिवारों में से केवल 51 के पास ही जमीन के वैध दस्तावेज मौजूद हैं।

