आसनसोल। हुगली
ज़िला के आरामबाग महकमा के भालिया गांव का सरकार परिवार दुर्गापूजा आयोजन में
बरसों से सांप्रदायिक सौहार्द का अद्भुत भावनात्मक सौंदर्य बिखेरता रहा है। वे एक ही
पंडाल में दुर्गा पूजा की संध्या आरती और अज़ान दोनों का आयोजन होता है। स्थानीय
ग्रामीण इसे सरकार बाड़ी दुर्गापूजा के नाम से पुकारते हैं।
आयोजक
परिवार की सबसे बड़ी सदस्य हेना सरकार हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पारिवारिक दुर्गा
पूजा की शुरुआत तीन सदी पहले तत्कालीन ज़मींदार बाबू राम सरकार ने की थी। उनके क्षेत्र
में मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या में थी। शुरुआती दौर में मुस्लिम परिवार
दुर्गापूजा से खुद को अलग रखते थे। पूजा के उल्लास व खुशी में उनको शामिल करने के
लिए जमींदार ने नई व्यवस्था शुरू की। दुर्गापूजा के दौरान संध्या में देवी को दीप
अर्पित करने के लिए जब संध्या आरती होती है, उसके बाद पंडाल से ही इस्लामिक
प्रार्थना के लिए बुलावे की अजान होती है। आज भी, ढोल की थाप, शंख की ध्वनि और घंटियों
की गूंज के बीच संध्या आरती होती है, तो मुस्लिम अज़ान पढ़ते हैं। इसके बाद, मुस्लिम
समुदाय नमात अता करने के लिए पंडाल में इकट्ठा होता है और दुर्गा पूजा का हिस्सा बनता
है। यह परंपरा दुर्गा पूजा के चारों दिन निभाई जाती है। परिवार के अधिकतर सदस्य कोलकाता
में रहते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा के दौरान सभी उत्सव मनाने के लिए भालिया स्थित अपने
पुश्तैनी घर आते हैं। उन्होंने कहा कि पूजा के चारों दिन एक ही दुर्गा पूजा मंडप के
नीचे दोनों समुदायों को एक साथ लाने की इस अनोखी परंपरा को नहीं छोड़ सकते। यह परंपरा
प्यार, एकता और भाईचारे का संदेश देती है और मानवता को बांटने वाली सभी रूढ़िवादी धार्मिक
बाधाओं को तोड़ती है।

