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सरकार बाड़ी परिवारिक दुर्गा पूजा की संध्या आरती, मुस्लिमों की अजान एक ही पंडाल के नीचे

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के भालिया गांव में सरकार परिवार पिछले तीन सौ वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है, जहां एक ही दुर्गा पूजा पंडाल के नीचे संध्या आरती और अजान दोनों का आयोजन होता है। परिवार की मुखिया हेना सरकार के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत स्थानीय मुस्लिम समुदाय को उत्सव में शामिल करने के लिए की गई थी जो आज भी दोनों समुदायों के बीच आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे को मजबूत करती है। यह अनूठी पहल समाज में मानवता को बांटने वाली रूढ़िवादी धार्मिक बाधाओं को तोड़कर सामाजिक समरसता का एक बड़ा संदेश देती है।

आर्थिक धारा डेस्क
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7 अक्टूबर 2026 को 12:30 pm बजे
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सरकार बाड़ी परिवारिक दुर्गा पूजा की संध्या आरती, मुस्लिमों की अजान एक ही पंडाल के नीचे
दुर्गापूजा की फाइल फोटो |Arthik Dhara Photo

आसनसोल। हुगली ज़िला के आरामबाग महकमा के भालिया गांव का सरकार परिवार दुर्गापूजा आयोजन में बरसों से सांप्रदायिक सौहार्द का अद्भुत भावनात्मक सौंदर्य बिखेरता रहा है। वे एक ही पंडाल में दुर्गा पूजा की संध्या आरती और अज़ान दोनों का आयोजन होता है। स्थानीय ग्रामीण इसे सरकार बाड़ी दुर्गापूजा के नाम से पुकारते हैं।

आयोजक परिवार की सबसे बड़ी सदस्य हेना सरकार हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पारिवारिक दुर्गा पूजा की शुरुआत तीन सदी पहले तत्कालीन ज़मींदार बाबू राम सरकार ने की थी। उनके क्षेत्र में मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या में थी। शुरुआती दौर में मुस्लिम परिवार दुर्गापूजा से खुद को अलग रखते थे। पूजा के उल्लास व खुशी में उनको शामिल करने के लिए जमींदार ने नई व्यवस्था शुरू की। दुर्गापूजा के दौरान संध्या में देवी को दीप अर्पित करने के लिए जब संध्या आरती होती है, उसके बाद पंडाल से ही इस्लामिक प्रार्थना के लिए बुलावे की अजान होती है। आज भी, ढोल की थाप, शंख की ध्वनि और घंटियों की गूंज के बीच संध्या आरती होती है, तो मुस्लिम अज़ान पढ़ते हैं। इसके बाद, मुस्लिम समुदाय नमात अता करने के लिए पंडाल में इकट्ठा होता है और दुर्गा पूजा का हिस्सा बनता है। यह परंपरा दुर्गा पूजा के चारों दिन निभाई जाती है। परिवार के अधिकतर सदस्य कोलकाता में रहते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा के दौरान सभी उत्सव मनाने के लिए भालिया स्थित अपने पुश्तैनी घर आते हैं। उन्होंने कहा कि पूजा के चारों दिन एक ही दुर्गा पूजा मंडप के नीचे दोनों समुदायों को एक साथ लाने की इस अनोखी परंपरा को नहीं छोड़ सकते। यह परंपरा प्यार, एकता और भाईचारे का संदेश देती है और मानवता को बांटने वाली सभी रूढ़िवादी धार्मिक बाधाओं को तोड़ती है।

 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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