आसनसोल।
दुर्गोत्सव की शुरुआत में ऑनलाइन बाजार ने रिकॉर्ड कारोबार किया है। पहले दो दिनों
में ही बिक्री करीब 24 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लेकिन शहर के बड़े बाजार
से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के व्यवसायियों में हताशा और दु:ख का माहौल है।
ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर छूट और अनुचित मूल्य निर्धारण के कारण
राज्य के खुदरा विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं की जान पर बन आई है। व्यवसायिक संगठन
कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन ने ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजारों में
उत्पादों की कीमतों में कृत्रिम अंतर को रोकने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए
तुरंत एक समान कीमतों की जोरदार मांग उठाई है।
त्योहारी
सीज़न की शुरुआत से ही प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां अविश्वसनीय छूट और कैशबैक ऑफ़र दे
रही हैं। सीडब्ल्यूबीटीए का मानना है कि बिक्री के ये आंकड़े सिर्फ तेजी से
बढ़ता व्यवसाय ही नहीं हैं, बल्कि देश के पारंपरिक खुदरा व्यवसाय के लिए खतरनाक
संकेत हैं। असामान्य मूल्य अंतर के कारण, त्योहारी खरीदारी का अधिकांश हिस्सा
तुरंत ऑनलाइन हो रहा है। जिसका सीधा असर स्थानीय छोटे बाजार की दुकानों की दैनिक
बिक्री पर पड़ रहा है। लाखों छोटे व्यवसायी साल भर में इस एक सीज़न का इंतज़ार
करते हैं।
व्यापारियों की हताशा का मुख्य कारण
प्रतिस्पर्धा है। कॉरपोरेट कंपनियां जो कर रही हैं, उसे स्वस्थ नहीं कहा जा सकता। एक
ऑफ़लाइन व्यापारी को हर महीने दुकान का बड़ा किराया देना पड़ता है, कर्मचारियों को
वेतन देना पड़ता है, उच्च वाणिज्यिक बिजली बिल और करों का भुगतान करना पड़ता है।
इसके अलावा उत्पादों के परिवहन और भंडारण पर भारी परिचालन लागत भी आती है। उन सभी
लागतों को पूरा करने के लिए उन्हें सीमित लाभ पर चीज़ें बेचनी पड़ती हैं। वहां, जब
ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म समान उत्पादों को कृत्रिम रूप से बनाए गए अतिरिक्त कम लागत
वाले आकर्षक विज्ञापन जाल में बेचते हैं तो व्यवसाय का मैदान एक समान नहीं होता
है। एक ही ब्रांड के एक ही उत्पाद को दो बाजारों में पूरी तरह से अलग-अलग कीमतों
पर बेचा जाना स्वीकार्य नहीं है। मॉडर्निटी के नाम पर लाखों छोटे व्यापारियों की
रोजी-रोटी नहीं छीनी जा सकती और उनका वजूद मिटाया नहीं जा सकता। CWBTA की मांग है
कि राज्य और केंद्र सरकारें और संबंधित पॉलिसी बनाने वाले तुरंत ऑनलाइन और ऑफलाइन
मार्केट के बीच इस कॉम्पिटिशन की जांच और रिव्यू करें। एक ही ब्रांड के प्रोडक्ट्स
की कीमतों में वाजिब बराबरी बनी रहे, इसके लिए सख्त कानूनी निगरानी की जरूरत है।

