आसनसोल। मां दुर्गा ने अन्याय और पाप को समाप्त
करने के लिए शक्ति का रूप लिया। वीरभूम के सिउड़ी निवासी एक और मां ने अपने बेटे की
मौत के लिए न्याय मांगने के लिए मां दुर्गा की शरण में जाने का निर्णय लिया है। वह
अपने पति के साथ पांच दिनों तक दुर्गापूजा पंडाल में लेटे रहने और प्रार्थना करने
का निर्णय लिया है। पूरी कहानी बेहद दु:खद और हृदयविदारक है। सिउड़ी निवासी पलटू
दास और उनकी पत्नी प्रतिमा दास का पुत्र मैनक दास था। अगले साल वह सेकेंडरी की
परीक्षा देनेवाला था। इस दुर्गोत्सव को लेकर वह बहुत ही एक्साइटेड था। परीक्षा की
तरह ही इसकी भी तैयारी कर रहा था। जूतों की नई जोड़ी खरीद ली थी। नए-नए सन ग्लासेस
भी खरीदे हैं। शीघ्र ही पंजाबी ड्रेस खरीदने वाला था। लेकिन उसकी ख्वाहिशें पूरी न
हो सकी। अचानक उसे पेट दर्द की वजह से नर्सिंग होम में भर्ती किया गया। 28 जुलाई की
सुबह उसे डिस्चार्ज किया जाना था। अचानक उसे एक इंजेक्शन लगाया गया और उसकी हालत तेज़ी
से बिगड़ने लगी। कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई। मां प्रतिमा और पिता पलटू ने बेटे
की मौत के लिए हॉस्पिटल अथॉरिटी और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर की लापरवाही को
जिम्मेवार बताया। लेकिन आरोपियों को सज़ा नहीं मिली। मां प्रतिमा का कहना है कि
पहले उसने सोचा था कि सेकेंडरी परीक्षा में बेटे के अच्छे रिजल्ट के लिए मां
दुर्गा से आशीर्वाद मांगेंगी। लेकिन वह सपना टूट गया। लेकिन वे फिर मां दुर्गा के
पास मंडप में पहुंचेंगी। लेकिन अच्छे रिज़ल्ट के लिए नहीं, बल्कि अपने बेटे की मौत
के इंसाफ के लिए। उन लोगों की सजा के लिए, जिन्होंने उनके बेटे की जान ले ली। उसने
फैसला लिया है कि अपने पति के साथ पांच दिनों तक पूजा मंडप में जमीन पर लेटी
रहेंगी और मां से प्रार्थना करेंगी। पूजा के ढोल चाहे कितने भी तेज़ क्यों न बजें,
मैनाक के लिए न्याय की गूंज ही उनके लिए सबसे प्रबल होगी।
ब्रेकिंग न्यूज़
सिउड़ी में बेटे की मौत का न्याय मां दुर्गा से मांगेंगा दंपत्ति, 5 दिनों तक मंडप में साष्टांग
वीरभूम के सिउड़ी निवासी पलटू दास और उनकी पत्नी प्रतिमा दास ने अस्पताल की लापरवाही से हुई अपने बेटे मैनक की मौत के इंसाफ के लिए अनूठा तरीका अपनाया है। वे आरोपियों को सजा दिलाने की गुहार लगाने हेतु आगामी पांच दिनों तक दुर्गा पूजा पंडाल में जमीन पर साष्टांग लेटे रहकर मां दुर्गा से प्रार्थना करेंगे। इस हृदयविदारक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दु:खी प्रमिला दास मैनक की तस्वीर के साथ|Arthik Dhara Photo
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