आसनसोल। बंगाल में दुर्गोत्सव आते ही
बांग्लादेशी इलिश मछली की मांग बढ़ जाती है। इसकी आवक बांग्लादेश से होती है।
बंगालियों की पहली पसंद इलिश मछली पद्मा नदी में पाई जाती है। इस वर्ष बांग्लादेश
ने इसके भारत में निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके कारण इसकी तस्करी बढ़ गई है।
दूसरी ओर भारत से बांग्लादेश में हिलसा मछली की तस्करी हो रही है। दोनों देशों के
सीमा सुरक्षा बल ने इस तस्करी को रोकने के लिए संयुक्त बैठक कर रणनीति तय की है।
भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड पहले
मवेशियों और इंसानों की अवैध आवाजाही पर नज़र रखते थे, अब इलिश और हिलसा मछली की तस्करी
रोकने के लिए भी पूरी तरह सतर्क हैं। बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड ने त्योहारों के मौसम
से पहले पद्मा की इलिश मछली की भारत में और गुजरात की हिलसा मछली की बांग्लादेश में
तस्करी को रोकने के लिए बीएसएफ से मदद मांगी है। पिछले हफ़्ते हुई बॉर्डर कोऑर्डिनेशन
की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। बांग्लादेश में इलिश की मांग काफी अधिक है। इस
साल कम पैदावार के बीच तस्करी की वजह से इसकी कीमतें बढ़ गई हैं। बांग्लादेश सरकार
ने भारत को इलिश मछली का एक्सपोर्ट रोक दिया है, वहीं नई दिल्ली ने इस साल जुलाई में
पहली बार बांग्लादेश को यह मछली एक्सपोर्ट करना शुरू किया था। इसमें ज़्यादातर गुजरात
की हिलसा मछली थी। लेकिन पिछले हफ़्ते ढाका ने गुजरात की हिल्सा की खराब क्वालिटी का
हवाला देते हुए इम्पोर्ट रोक दिया। बीजीबी ने तस्करी को रोकने के लिए नदी और ज़मीनी
सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी बहुत बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 जुलाई से
20 सितंबर के बीच बेनापोल बॉर्डर पॉइंट से 553 टन गुजरात की हिलसा बांग्लादेश पहुंची।
23 सितंबर को ढाका ने इम्पोर्ट करने वालों को जारी किए गए 103 नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
रद्द करके भारत से हिल्सा का इम्पोर्ट रोक दिया। बांग्लादेश से मिली रिपोर्टों में
कहा गया है कि यह कदम इम्पोर्ट की गई भारतीय हिलसा को लोकल या पद्मा इलिस बेचे जाने
से रोकने, अंडर-इनवॉइसिंग के ज़रिए संभावित मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने और घरेलू हिल्सा
प्रोडक्शन में ज़्यादा दिलचस्पी को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया था।

