दुर्गापुर। दुर्गापुर
पूर्व के विधायक चन्द्रशेखर बनर्जी ने दावा किया कि कांकसा ब्लॉक के गढ़ जंगल के अंदर
स्थित मेघा मुनि आश्रम को विकसित कर देश के चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल किया जायेगा।
राज्य सरकार शीघ्र ही इस योजना को मंजूरी देगी। पौराणिक कथाओं और देवी पूजा की इससे
जुड़ी कहानी है। राजा सुरथ और देवी दुर्गा की
पूजा की लोककथाएं इससे जुड़ी हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस जगह पर पुराने समय में दुर्गा
की पूजा शुरू हुई थी। उस परंपरा के कारण, आज भी बहुत से लोग दुर्गा पूजा के दिनों में
मेधा मुनि के आश्रम में आते हैं। दुनिया की पहली दुर्गा पूजा यहीं हुई थी। चंडीधाम
का नाम दुर्गा पूजा की पुरानी परंपरा से जुड़ा है। शाल, सागौन और महुआ के पेड़ों से
घिरा, मेधा मुनि का आश्रम है, जिसे स्थानीय लोग गढ़ चंडीधाम के नाम से भी जानते हैं।
लोककथाओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, बीरभूम जिले के बालीपुर (अब सुपुर) के राजा सुरथ
युद्ध में अपना राज्य हार गए और अजय नदी के किनारे जंगल (अब गढ़ जंगल) में मेधा मुनि
के आश्रम में आकर तपस्या करने लगे। लगभग तीन साल की कड़ी तपस्या के बाद, राजा सुरथ
को अपना राज्य वापस मिला। तपस्या के बाद, मेधा मुनि की सलाह पर, राजा सुरथ ने वसंत
ऋतु में देवी दुर्गा की पूजा की। उसी मान्यता से, इस जगह को दुर्गा पूजा की शुरुआत
माना जाता है। इतिहास, पौराणिक कथाओं और लोक मान्यताओं के मेल के कारण गढ़ जंगल में
चंडी धाम आज भी खास आकर्षण का केंद्र है। इस आश्रम के आसपास पौराणिक कहानियों की कई
यादें आज भी ताज़ा हैं। एक समय था जब जंगली जानवरों के हमले के डर से यहां ज़्यादा
लोग नहीं आते थे। लेकिन अब रातों-रात तस्वीर बदल गई है। पूजा के चारों दिन यहां भीड़
उमड़ती है। गढ़ जंगल की सड़क पक्की होने से भीड़ का लेवल और बढ़ गया है। एक पक्का मंदिर
बन गया है। योगी ब्रह्मनंदी ने कहा कि दुर्गापूजा की शुरुआत यहीं से हुई थी। राजा सुरथ
ने सबसे पहले वसंत ऋतु में यहीं देवी दुर्गा की पूजा की थी। आज भी साधु यहां की परंपरा
के अनुसार देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। दुर्गोत्सव में कुछ ही दिन और बचे हैं। उमा
के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं।
ब्रेकिंग न्यूज़
राजा सुरथ ने की थी पहली दुर्गापूजा कांकसा के गढ़ जंगल में
दुर्गापुर पूर्व के विधायक चन्द्रशेखर बनर्जी ने दावा किया है कि कांकसा के गढ़ जंगल स्थित मेधा मुनि आश्रम दुनिया की पहली दुर्गा पूजा का स्थल है, जहां राजा सुरथ ने पहली बार देवी की आराधना की थी। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित कर देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने जा रही है। इस योजना के मूर्त रूप लेने से स्थानीय क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

आश्रम में लगी पटि्टका|Arthik Dhara Photo
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