कोलकाता।
महानगर के नॉर्थ कोलकाता के मानिकतला इलाके में मोतीलाल मित्रा लेन की बांधव समिति
की दुर्गा पूजा के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस आयोजन को यादगार बनाये रखने के लिए
कमेटी ने नया थीम चुना है। विषय है पुराने कलकत्ता का बीता समय, मौजूदा समय। यह पूजा
इलाके की जानी-मानी और पारंपरिक पूजाओं में से एक है। नॉर्थ कोलकाता की सदियों पुरानी
परंपराओं के साथ-साथ, ऐसी पूजा समितियां अपने इलाके के आधार पर अपनी लंबे समय से चली
आ रही सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए हुए हैं। नॉर्थ कोलकाता के मानिकतला,
बागबाजार, शिमला ब्यायाम समिति जैसे पूजा मंडपों में पुरानी और आस-पड़ोस की पूजाओं
का अपना एक अलग ही सच्चा माहौल होता है, जो खास तौर पर आने वालों को अपनी ओर खींचता
है। आने वाले लोग अपने पारिवारिक माहौल और पारंपरिक पुरानी और पारंपरिक पूजाओं के लिए
खास तौर पर पसंद करते हैं। मॉडर्न थीम वाली पूजाओं की भीड़-भाड़ के बीच भी, बांधव समिति
अपनी पूजाओं में सुंदर घरेलू और पारंपरिक माहौल बनाए रखना पसंद करती है। यहां मूर्तियों
का रूप और मंडप की सजावट पारंपरिक टच को सामने लाती है।
यह पूजा
मुख्य रूप से इलाके के लोगों की सक्रिय भागीदारी और सच्चे सहयोग से विकसित की गई है।
पूजा के दिनों में, यहां आस-पड़ोस का मिलना-जुलना या जमावड़ा देखने लायक होता है। आयोजक
कई तरह के सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते है, जिसमें स्थानीय प्रतिभाएं
हिस्सा लेती हैं।

