Arthik Dhara
ब्रेकिंग न्यूज़

आनेवाले दशकों में नहीं दिखेगा विजयदशमी पर भगवान शिव का संदेशवाहक नीलकंठ

विजयादशमी पर भगवान शिव का संदेशवाहक माने जाने वाला नीलकंठ पक्षी (इंडियन रोलर) तेजी से विलुप्त होने की कगार पर है। अनियंत्रित शहरीकरण, जंगलों की कटाई और अत्यधिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण पिछले एक दशक में इनकी संख्या में 30 से 41 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दशकों में इस शुभ पक्षी के दीदार दुर्लभ हो जाएंगे, जो पारिस्थितिक तंत्र के लिए भी चिंता का विषय है।

आर्थिक धारा डेस्क
आर्थिक धारा डेस्क
22 अक्टूबर 2026 को 11:08 am बजे
WhatsApp
आनेवाले दशकों में नहीं दिखेगा विजयदशमी पर भगवान शिव का संदेशवाहक नीलकंठ
पहाड़ पर बैठे नीलकंठ का फाइल फोटो|Arthik Dhara Photo

आसनसोल। विजयादशमी को नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ माना जाता है। पुराणों में इसे भगवान शिव का दूत कहा गया है। मान्यता है कि यह पक्षी भगवान शिव को मां दुर्गा के प्रस्थान का संदेश देता है। दूसरी मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर भगवान श्रीराम को विजय का आशीर्वाद दिया था। नीलकंठ के दर्शन करना बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। जातक पर भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। इस पक्षी को अंग्रेजी में इंडियन रोलर (Indian Roller) कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम कोरासियास बेंगालेन्सिस (Coracias benghalensis), संस्कृत नाम नीलकण्ठ, तेलुगु में पाला-पिट्‌टा कहा जाता है। यह ओडिसा, तेलंगाना और कर्नाटक का राजकीय पक्षी है। पिछले कुछ वर्षों में इसकी संख्या में भारी गिरावट आई है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने इसे अल्पमत चिंता (लीस्ट कन्सर्न) की श्रेणी से हटा कर संकट निकट (नियर थ्रेटेनेड) की श्रेणी में डाल दिया है। पिछले 12 वर्षों में इसकी संख्या में 30 फीसदी से लेकर 41.5 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। इसकी कमी के मुख्य कारणों में तेजी से हो रही शहरीकरण, जंगलों की कटाई और घास के मैदानों का कम होना है। यह पुराने और ऊंचे पेड़ों के खोखले तनों में अंडे देता है। ऐसे पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। खेतो में रसायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के इस्तेमाल से इसके आङार कीड़े-मकोड़े, टिड्‌डे और भृंग समाप्त हो रहे हैं। दूषित कीड़े खआने से इनकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। मोबाइल फोन टावरों से निकलनेवाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन भी इनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है। 2012-13 तक, नीलकंठ पश्चिमी ज़िलों में काफ़ी देखा जाता था। लेकिन उसके बाद से यह कम होने लगा है।

 

आर्थिक धारा डेस्क
आर्थिक धारा डेस्क

आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

WhatsApp
विज्ञापन

आर्थिक धारा पर अपने व्यवसाय का विज्ञापन दें

पश्चिम बंगाल और भारत के हज़ारों निवेशकों और व्यावसायिक लीडर्स तक पहुंचें।

বিজ্ঞাপন দেন / Advertise
12 टिप्पणियां