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बंगाल के एनकाउंटरों पर मंत्री अग्निमित्रा पाल ने लिखी कविता

पश्चिम बंगाल में एक ही दिन में हुए दो एनकाउंटर की घटनाओं पर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है, जहां मुख्यमंत्री ने अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है। वहीं, मंत्री अग्निमित्रा पाल ने एक कविता के जरिए राज्य में कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए अपनी बात रखी है। इन एनकाउंटरों और राजनीतिक बयानों से राज्य के आर्थिक और सामाजिक माहौल पर गहरा असर पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा और न्याय के मुद्दों पर बहस छिड़ गई है।

आर्थिक धारा डेस्क
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28 अक्टूबर 2026 को 12:51 pm बजे
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बंगाल के एनकाउंटरों पर मंत्री अग्निमित्रा पाल ने लिखी कविता
मंत्री अग्निमित्रा पाल का फाइल फोटो |Arthik Dhara Photo

आसनसोल। राज्य में एक ही दिन में हुए दो एनकाउंटर पर खूब चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष राय से भरा पड़ा है। मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कविता के ज़रिए अपनी बात रखी है। पुलिस ने गायघाटा में रेप-मर्डर केस के आरोपी और मुर्शिदाबाद के धुलियान में BJP नेता की हत्या के आरोपी को भी एनकाउंटर में मार गिराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे अपराधों को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपना रही है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि बंगाल में कानून का राज है। मंत्री अग्निमित्रा पाल ने एक कविता के ज़रिए एनकाउंटर पर अपनी बात रखी है।

दूसरी तरफ, जैसे ही यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हुई, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। आसनसोल दक्षिण की विधायक ने क्या लिखा? अग्निमित्रा पाल ने लिखा- 'क्राइम रुक जाए, लोग जिएं, डर का अंधेरा दूर हो जाए। जिस हाथ पर लोगों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, उस हाथ से बार-बार क्राइम रुक जाए। इस तरह उन्होंने क्राइम रोकने और डर के अंधेरे को दूर करके लोगों को ज़िंदा रहने देने की वकालत की। पुलिस लोगों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है। इसलिए, उस हाथ को बार-बार क्राइम रोकने के लिए काम करने दें। नगर निगम और शहरी विकास मंत्री ने कविता के ज़रिए यह संदेश दिया। हालांकि दोनों घटनाओं में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शुभेंदु अधिकारी के राज में यह तीसरा एनकाउंटर है। पहले बरुईपुर में एनकाउंटर हुआ था। हालांकि, तीनों ही जुर्म बहुत गंभीर हैं। इन मुद्दों पर अग्निमित्रा पाल की कविता कहती है, 'फिर भी हिम्मत की कीमत कम नहीं, इंसानी सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं। राज्य की ताकत लोगों के साथ हो, हर घर में शांति की सुबह लौटे। हम जुर्म को दबाने में सख्ती चाहते हैं, और इंसानी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं।' इस कविता से साफ है कि राज्य में शांति लौटनी चाहिए और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।  

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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