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धनबाद के पुटकी श्रीनगर में सास ने शुरू की दुर्गा पूजा, बहुएं संभाल रहीं विरासत

धनबाद के पुटकी स्थित श्रीनगर में 1993 में शुरू हुई दुर्गा पूजा महिला सशक्तिकरण और परंपरा का अनूठा उदाहरण बन गई है। इस पूजा की शुरुआत करने वाली सास के निधन के बाद अब उनकी बहुएं चंदा जुटाने से लेकर विसर्जन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह पहल न केवल पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत कर रही है, बल्कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता का भी एक सशक्त प्रतीक है।

आर्थिक धारा डेस्क
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14 अक्टूबर 2026 को 11:33 pm बजे
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धनबाद के पुटकी श्रीनगर में सास ने शुरू की दुर्गा पूजा, बहुएं संभाल रहीं विरासत
चंदा संग्रह करती महिलाओं की टीम|Arthik Dhara Photo

धनबाद। परंपराएं निभाई नहीं जातीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपी भी जाती हैं। धनबाद के पुटकी स्थित श्रीनगर में दुर्गा पूजा की यही कहानी है। सास ने मां दुर्गा की आराधना की जो परंपरा शुरू की थी, आज उसे बहुएं आगे बढ़ा रही हैं। वर्ष 1993 में शुरू हुई इस पूजा को 33 साल हो चुके हैं।  कभी सास और घर की बुजुर्ग महिलाएं पूजा की जिम्मेदारी संभालती थीं, तो आज बहुएं घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ चंदा जुटाने से लेकर पूजा की तैयारी तक का काम कर रही हैं। यह कहानी सिर्फ दुर्गा पूजा की नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच विश्वास, रिश्तों की मजबूती और महिला सशक्तीकरण की भी है, क्योंकि यहां की दुर्गा पूजा में चंदा से लेकर विसर्जन तक की जिम्मेदारी महिलाएं ही संभालती हैं।

1993 में धनबाद के पुटकी स्थित श्रीनगर में दुर्गा पूजा की शुरुआत घोष परिवार की रेणुका घोष ने की थी। उस वक्त किसी ने शायद नहीं सोचा होगा कि यह पहल आने वाले वर्षों में महिला एकता की पहचान बन जाएगी। समय बदला, उनके निधन के बाद अब उनकी बहू कुमकुम घोष ने पूजा की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है। लेकिन पूजा के प्रति श्रद्धा और समर्पण आज भी वैसा ही है।

पहले श्रीनगर की महिलाओं को पूजा-अर्चना और पुष्पांजलि के लिए पुटकी बाजार स्थित मंदिर जाना पड़ता था। वहां श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी अधिक होती थी कि कई बार उन्हें ठीक से पूजा करने का अवसर नहीं मिल पाता था। इसके बाद महिलाओं ने अपने ही मोहल्ले में दुर्गा पूजा शुरू करने का फैसला किया। रेणुका घोष और परिवार की अन्य महिलाओं की इस पहल को अब बहुएं आगे बढ़ा रही हैं। इसके लिए महिला समिति बनाई गई. इस तरह एक पीढ़ी ने परंपरा की नींव रखी, तो दूसरी पीढ़ी उसे मजबूती देने में जुटी है। 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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