Arthik Dhara
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बारामुड़ी खटाल बचाव आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सांसद पप्पू यादव

धनबाद के बारामुड़ी खटाल बचाव आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सांसद पप्पू यादव के आने से इस क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामले में 155 घरों और दुकानों को नोटिस जारी किया है, जिससे स्थानीय लोगों पर बेघर होने का संकट मंडरा रहा है। प्रशासन द्वारा वैध दस्तावेज न दिखाने पर बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की चेतावनी के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर एक बड़ा आर्थिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है।

आर्थिक धारा डेस्क
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4 नवंबर 2026 को 12:52 pm बजे
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बारामुड़ी खटाल बचाव आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सांसद पप्पू यादव
धनबाद स्टेशन पर स्वागत करते समर्थक|Arthik Dhara Photo

धनबाद। बारामुड़ी खटाल बचाव आंदोलन को समर्थन देने बिहार के सांसद पप्पू यादव धनबाद पहुंच गए हैं। रेलवे स्टेशन पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। उनके धनबाद पहुंचने के बाद अब बारामुड़ी खटाल बचाव आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने की उम्मीद है। खटाल बचाने की इस लड़ाई में सांसद पप्पू यादव की भूमिका और उनके अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।

बारामुड़ी खटाल में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब 18 एकड़ जमीन की मापी और सर्वे के बाद जिला प्रशासन ने 155 घरों और दुकानों को अनधिकृत चिह्नित करते हुए नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब देने के लिए निर्धारित तारीख 2 नवंबर को खटालवासी धनबाद अंचल कार्यालय पहुंचे।जहां उन्होंने जमीन से संबंधित दस्तावेज जुटाने और अपना पक्ष रखने के लिए प्रशासन से अतिरिक्त समय मांगा। अंचल कार्यालय पहुंचे लोगों का कहना था कि जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेज जुटाने में समय लगेगा। इसलिए उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त मोहलत दी जानी चाहिए। खटालवासियों ने एक बार फिर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि करीब 20 से 22 वर्ष पहले तत्कालीन उपायुक्त के निर्देश पर उन्हें बेकारबांध से हटाकर बारामुड़ी में बसाया गया था.ऐसे में अब उन्हें वहां से हटाना उचित नहीं है। धनबाद अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने अतिक्रमणवाद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बारामुड़ी में जमीन की मापी के बाद प्रथम नोटिस जारी कर संबंधित लोगों से जवाब मांगा गया है। लोगों की ओर से जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई है जिस पर उन्हें मोहलत दी जा रही है। निर्धारित समयसीमा के भीतर जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वालों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद भी यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो प्रशासन बल प्रयोग कर सरकारी जमीन खाली कराएगा। उन्होंने साफ किया कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हर हाल में आगे बढ़ेगी।

 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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