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दुर्गोत्सव में डेंगू से रहे सचेत, बुखार के 5 दिनों में कराये NS-1 एंटीजन ELISA टेस्ट

पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत बुखार के शुरुआती पांच दिनों में NS-1 एंटीजन ELISA टेस्ट कराने की सलाह दी गई है। राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 9,000 तक पहुंच गई है, जिससे निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी ने उच्च स्तरीय बैठक कर प्रशासनिक और चिकित्सीय सतर्कता बढ़ा दी है। इस स्वास्थ्य संकट से सार्वजनिक जीवन और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है।

आर्थिक धारा डेस्क
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8 अक्टूबर 2026 को 05:59 pm बजे
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दुर्गोत्सव में डेंगू से रहे सचेत, बुखार के 5 दिनों में कराये NS-1 एंटीजन ELISA टेस्ट
डेंगू बीमारी के लक्षणों की जानकारी का फाइल फोटो |Arthik Dhara Photo

आसनसोल। दुर्गोत्सव का आनंद उठाना है तो हेल्थ के प्रति लापरवाह न बने। बंगाल में डेंगू बीमारी बड़ी चुनौती बन कर उभरी है। राज्य के हेल्थ विभाग की वेबसाइट पर जो जानकारी पोस्ट की गई है, उसके अनुसार 3700 लोगों की डेंगू जांच की गई। इनमें से 128 डेंगू पॉजिटिव पाये गये हैं। डेंगू की वजह से 256 लोग हॉस्पिटल में भर्ती हैं। सरकार ने गाइडलाइंस जारी कर कहा है कि बुखार आने के पहले पांच दिनों के अंदर डेंगू का पता लगाने के लिए NS-1 एंटीजन ELISA टेस्ट जरूर करायें। पांच दिनों के बाद IGM टेस्ट कराये।

स्थिति को नजाकत को देखते हुए हेल्थ मिनिस्टर डॉ. शरदवत मुखर्जी ने सात म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, छह म्युनिसिपैलिटी, सभी मेडिकल कॉलेज और राज्य के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेटों के साथ बैठक की। इनमें AMC, DMC, KMC, HMC, सिलीगुड़ी विधाननगर के कमिश्नर मौजूद थे। राज्य में कुल इन्फेक्टेड मरीजों की संख्या 9,000 है। मुर्शिदाबाद सबसे ज्यादा प्रभावित है। कोलकाता, नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, हुगली दूसरे नंबर पर हैं। बैठक के बाद जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि डेंगू बुखार के शुरुआती तीन से पांच दिनों तक कड़ी निगरानी की ज़रूरत है। मरीज़ के पेशाब, नींद, दौरे या किसी भी दूसरे शारीरिक बदलाव पर नज़र रखनी चाहिए। मरीज़ के परिजनों को भी इस बारे में बताना चाहिए। अगर मरीज़ को पेट दर्द, बार-बार उल्टी, बहुत ज़्यादा कमज़ोरी, दौरे, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से से खून बहने जैसा महसूस हो, तो उन्हें तुरंत हेल्थ सेंटर से संपर्क करना चाहिए। डेंगू का असली खतरा अक्सर बुखार उतरने के बाद शुरू होता है। इसलिए, बुखार उतरने के बाद भी मरीज़ को निगरानी में रखना ज़रूरी है। बुखार के शुरुआती पांच दिनों के अंदर डेंगू का पता लगाने के लिए NS-1 एंटीजन ELISA टेस्ट कराना चाहिए। पांच दिन बाद IgM टेस्ट करवाना चाहिए। अगर बुखार 10 दिन से ज़्यादा रहे, तो सिर्फ़ डेंगू ही नहीं, बल्कि लेप्टोस्पायरोसिस या स्क्रब टाइफस जैसे दूसरे इंफेक्शन की भी संभावना की जांच करानी चाहिए।

 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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