Arthik Dhara
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बिहार, झारखंड से आ रहा बालू, बंगाली व्यवसायी संकट में

बिहार और झारखंड से अवैध रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में आ रहे बालू के कारण स्थानीय व्यवसायियों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इन वाहनों पर लगे इनवॉइस और क्यूआर कोड की वैधता पर गंभीर सवाल उठे हैं, जिससे वैध रूप से टैक्स चुकाकर व्यापार करने वाले व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। स्थानीय भाजपा नेताओं और व्यापारियों ने जिला प्रशासन से सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने और इस अवैध आपूर्ति को तुरंत रोकने की मांग की है।

आर्थिक धारा डेस्क
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26 सितंबर 2026 को 08:54 pm बजे
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बिहार, झारखंड से आ रहा बालू,  बंगाली व्यवसायी संकट में
बिहार और झारखंड से हो रही अवैध बालू की सप्लाई से पश्चिम बंगाल के स्थानीय व्यवसायी संकट में।|Arthik Dhara Photo

आसनसोल। बिहार और झारखंड से बालू बंगाल में धड़ल्ले से आ रहा है। सीमावर्ती वीरभूम जिले के ट्रेडर्स को बहुत ज़्यादा नुकसान हो रहा है। स्थानीय भाजपा नेताओं ने यह मामला जिला प्रशासन और जिला पुलिस के समक्ष उठाया है। आरोप है कि अन्य राज्यों से आनेवाले वाहनों के डॉक्यूमेंट्स पर लगे QR कोड सरकारी जानकारी को स्कैन करने पर नहीं मिलते हैं। नतीजतन, इनवॉइस की वैलिडिटी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

बालू व्यवसायियों का आरोप है कि मार्केट का फ़ायदा उठाकर बिहार और झारखंड से काफ़ी कम कीमत पर बंगाल के सीमावर्ती जिले में बेचने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि ऐसे बालू लदे वाहन रामपुरहाट के सीमावर्ती क्षेत्र के अलावा जिले के विभिन्न मार्गों से प्रवेश कर रहे हैं। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार एक अगस्त से नदी से बालू निकासी पर रोक लगा दी गई है। साथ ही बालू परिवहन पर भी रोक है। व्यापारियों का दावा है कि बालू की आपूर्ति में कमी हो गई है। उनके अनुसार, नियमों के अनुसार व्यापार करने के लिए इस दौरान एक निश्चित मात्रा में बालू का भंडारण पहले से करना पड़ता है। उस बालू के लिए सरकारी टैक्स और अन्य निर्धारित लागतों को वहन करना पड़ता है। नतीजतन, इस दौरान बालू की कीमत भी सामान्य से थोड़ी अधिक होती है। शिकायत करने वालों का दावा है कि गाड़ी चलाने वालों के दिखाए गए कागज़ों में QR कोड तो हैं, लेकिन स्कैन करने पर कोई जानकारी नहीं मिलती। सही कंसाइनमेंट होने पर QR कोड स्कैन करने पर गाड़ी, मालिक, ट्रांसपोर्ट का सोर्स और डेस्टिनेशन समेत कई जानकारी मिलती है। यहां तक ​​कि इनवॉइस का वैलिडिटी पीरियड भी बताया जाता है। लेकिन कुछ शक वाले इनवॉइस में, आरोप है कि स्कैन करने के बाद नहीं मिला का मैसेज आता है।

बालू व्यापारियों के मुताबिक, वे नियम के हिसाब से टैक्स देकर रेत जमा कर रहे हैं। लेकिन, अगर बाहर से कम कीमत पर बालू आता है, तो इसका सीधा असर जायज़ कारोबारी मार्केट पर पड़ेगा। इसलिए, नकली चालान के आरोपों के अलावा, दूसरे राज्यों से बालू की एंट्री रोकने के लिए जिले के अलग-अलग बॉर्डर और सड़कों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की जा रही है। जिला पुलिस और प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, मामला उनके ध्यान में आया है और ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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