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ईसीएल के खिलाफ होगा गांव बचाओ, कोलियरी बचाओ आंदोलन

आसनसोल में ईसीएल की हरिपुर ओपन कास्ट माइनिंग परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों ने 'गांव बचाओ, कोलियरी बचाओ' आंदोलन का ऐलान किया है, जिससे दर्जनों गांवों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए एक संग्राम समिति का गठन किया गया है, जो विस्थापन और रोजगार छिनने की आशंका को लेकर जिला प्रशासन व ईसीएल मुख्यालय के समक्ष बड़ा आंदोलन करेगी। नेताओं का तर्क है कि आधुनिक तकनीक से जमीन के नीचे की खदानों का उपयोग करके इलाके को बचाए रखते हुए कोयला निकाला जा सकता है।

आर्थिक धारा डेस्क
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30 सितंबर 2026 को 10:37 am बजे
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ईसीएल के खिलाफ होगा गांव बचाओ, कोलियरी बचाओ आंदोलन
ईसीएल मुख्यालय का फाइल फोटो |Arthik Dhara Photo

आसनसोल। ECL की महत्वांकाक्षी परियोजना हरिपुर में प्रस्तावित है। नए ओपन कास्ट माइनिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। हरिपुर में जन सम्मेलन आयोजित कर गांव बचाओ, कोलियरी बचाओ का प्रस्ताव पारित किया गया। आंदोलनकारियों के अनुसार ECL ने पांडेश्वर, अंडाल और जामुड़िया में कुल 4218 हेक्टेयर ज़मीन ओपन कास्ट माइनिंग के लिए चिन्हित की है। ओसीपी के पहले फेज़ में 2100 हेक्टेयर ज़मीन पर काम शुरू करने का प्लान है। नेशनल हाईवे 14 के किनारे शंकरपुर से कृष्णानगर कोलियरी तक इस बड़े प्रोजेक्ट में 32 गांव, आठ अंडरग्राउंड खदानें, कई बाज़ार, स्कूल और अस्पताल के प्रभावित होने के दावे किये जा रहे हैं। इसके विरोध में बड़ा आंदोलन खड़ा करने के लिए सग्राम समिति का गठन किया गया। इसमें वकील सौमेन मित्रा को कन्वेनर बनाया गया। कमेटी के अन्य सदस्यों में सुभाष बाउरी, नीलिमा रुईदास, सारथी सोरेन, हराधन गोप और मोहम्मद साबिर शामिल हैं। कन्वेनर सौमेन मित्रा ने कहा कि पहले चरण में प्रभावित गांवों में व्यापक सघन प्रचार व जागरूकता अभियान चलाया जायेगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा सके। इसके बाद जिला प्रशासन और ECL मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया जाएगा।

कन्वेंशन में शामिल रहे CPM के जिला सचिव सह कोलियरी मजदूर सभा के नेता पूर्व विधायक गौरांग चटर्जी ने कहा कि पहले भी भटमुरा, भालुका, हंस्तिहा, बिलपहाड़ी जैसे कई गांव ओपन-कास्ट माइनिंग से खत्म हो चुके हैं। पहले फेज में अगर शंकरपुर कोलियरी, मिलेनियम इनक्लाइन और चोडा CBI इनक्लाइन ओपन-कास्ट माइंस बन गईं, तो मजदूरों का ट्रांसफर हो जाएगा और इलाके की पूरी इकॉनमी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दूसरे फेज में अगर हरिपुर, न्यूकेंडा, खासकेंडा, कृष्णानगर, बहुला और सिदुली जैसी सभी अंडरग्राउंड माइंस ओपन-कास्ट माइंस बन गईं, तो अगले 10 साल में कई पंचायतें और गांव खत्म हो जाएंगे। गिरीश श्रीवास्तव, CITU लीडर मनोज दत्त ने साफ़ तौर पर कहा कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ज़मीन के नीचे की खदानों से इलाके को बर्बाद किए बिना हज़ारों-लाखों टन कोयला निकालना मुमकिन है और केंद्र सरकार को वह दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए।

 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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