Arthik Dhara
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धनबाद के 10 पर्यटन स्थलों की सूरत बदली जाएगी DMFT के 2.39 करोड़ से

धनबाद जिले में कोयला नगरी की पहचान से आगे बढ़कर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के 2.39 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 10 प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का विकास किया जाएगा। लघु सिंचाई प्रमंडल द्वारा इन विकास कार्यों के लिए ई-निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे पर्यटकों की सुविधाओं में विस्तार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। चार महीने की कार्य अवधि वाली इन योजनाओं से धनबाद की पर्यटन क्षमता मजबूत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

आर्थिक धारा डेस्क
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5 अक्टूबर 2026 को 07:50 pm बजे
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धनबाद के 10 पर्यटन स्थलों की सूरत बदली जाएगी DMFT के 2.39 करोड़ से
प्रतीकात्मक तस्वीर |Arthik Dhara Photo

धनबाद : धनबाद की पहचान अब सिर्फ कोयला और औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी। जिले के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में पहल शुरू की गयी है। जिले के 10 प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूरत बदलने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) मद से 2.39 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये जायेंगे।

लघु सिंचाई प्रमंडल, धनबाद ने इन योजनाओं के लिए ई-निविदा जारी की है। योजनाएं पूरी होने के बाद पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। प्रस्तावित योजनाओं के तहत गोविंदपुर के वनकाली मंदिर में 24.84 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे। झरिया के दुखहरणी मंदिर के लिए 24.98 लाख रुपये, तोपचांची झील के लिए 24.97 लाख रुपये और कतरास के लिलोरी मंदिर के लिए 23.79 लाख रुपये का प्रावधान है।

इसी तरह कलियासोल के दलदली आश्रम में 24.93 लाख रुपये, धनबाद के भंटिडा फॉल में 24.65 लाख रुपये, बाघमारा के श्री श्री बुढ़ा बाबा शिव मंदिर में 22.05 लाख रुपये और टुंडी के भागुडीह डैम में 24.66 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे। झरिया के कल्याणेश्वरी मंदिर के लिए 24.96 लाख रुपये तथा तोपचांची के लिलोरी मंदिर गंगापुर के लिए 14.34 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

पर्यटन विकास की इस सूची में धनबाद के धार्मिक और प्राकृतिक दोनों तरह के स्थल शामिल हैं। वनकाली मंदिर, दुखहरणी मंदिर, लिलोरी मंदिर, श्री श्री बुढ़ा बाबा शिव मंदिर और कल्याणेश्वरी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के साथ तोपचांची झील, भंटिडा फॉल और भागुडीह डैम जैसे प्राकृतिक स्थलों को भी विकसित करने की योजना है। दलदली आश्रम को भी योजना में शामिल किया गया है। इन स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विकास से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। इसका फायदा स्थानीय लोगों को भी मिल सकता है। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने पर दुकान, खान-पान, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।

सभी योजनाओं की कार्य अवधि चार माह निर्धारित की गयी है। निविदा 24 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित होगी। ऑनलाइन आवेदन 24 अक्टूबर से 2 नवंबर की शाम 5 बजे तक जमा किये जा सकेंगे। ऑनलाइन बीड 4 नवंबर को दोपहर 2 बजे कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, लूबी सर्कुलर रोड स्थित कार्यालय में खोली जायेगी। अलग-अलग योजनाओं के लिए निविदा शुल्क 2,500 से 5,000 रुपये तक निर्धारित किया गया है, जबकि अग्रधन की राशि 28,700 से 50,000 रुपये तक रखी गयी है।

निविदा में स्पष्ट किया गया है कि केवल ई-निविदा ही मान्य होगी। काम के वास्तविक परिमाण के अनुसार परिमाण विपत्र की राशि में कमी या बढ़ोतरी हो सकती है। अग्रधन जिस खाते से जमा किया जायेगा, उसी खाते में वापस किया जायेगा।निविदा से संबंधित विस्तृत जानकारी झारखंड ई-टेंडर पोर्टल पर उपलब्ध करायी गयी है। योजनाओं के पूरा होने के बाद पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं में सुधार के साथ उनकी पहुंच और उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है। इससे धनबाद की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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