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जापान में शोध करेंगे IIT-ISM के दो शोधार्थी, एक हैजा नियंत्रण तो दूसरा रोबोट डेवलपमेंट

आईआईटी-आईएसएम धनबाद के दो शोधार्थी, धीरज कुमार श्रीवास्तव और विश्वजीत, विज्ञान और तकनीक के जरिए बड़ी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए जापान में उन्नत शोध करेंगे। धीरज जापान की क्यूशू यूनिवर्सिटी में गणितीय मॉडलिंग के माध्यम से हैजा जैसी संक्रामक बीमारियों के प्रसार और नियंत्रण पर शोध करेंगे। इन अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध अवसरों से स्वास्थ्य और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भविष्य की तकनीकी संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

आर्थिक धारा डेस्क
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4 नवंबर 2026 को 11:26 pm बजे
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जापान में शोध करेंगे IIT-ISM के दो शोधार्थी, एक हैजा नियंत्रण तो दूसरा रोबोट डेवलपमेंट
शोध के लिए चयनित धीरज कुमार श्रीवास्तव, विश्वजीत|Arthik Dhara Photo

धनबाद। IIT-ISM के दो शोधार्थी जापान में शोध करेंगे। दोनों की रिसर्च का मसविदा अलग-अलग है, लेकिन लक्ष्य एक विज्ञान और तकनीक के जरिए बड़ी समस्याओं का समाधान खोजना। एक शोधार्थी गणितीय मॉडलिंग से हैजा जैसी संक्रामक बीमारी के प्रसार को समझेंगे और रोकथाम की बेहतर रणनीति विकसित करेंगे तो दूसरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से रोबोट को यह सिखाएगा कि कोई वस्तु किस पदार्थ से बनी है। स्वास्थ्य से लेकर कचरा प्रबंधन तक, इन शोधों में भविष्य की कई संभावनाएं छिपी हैं। आईआईटी आईएसएम धनबाद के शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध का अवसर मिला है। डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग के पीएचडी स्कॉलर धीरज कुमार श्रीवास्तव और दूसरे शोधार्थी विश्वजीत अपनी-अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में नई संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। जापान में उन्हें उन्नत शोध सुविधाओं, तकनीक और विशेषज्ञों के साथ काम करने का मौका मिलेगा। इनकी कोशिश है कि वहां से मिले अनुभव और ज्ञान का लाभ भारतीय शोध जगत को भी मिले। धीरज कुमार श्रीवास्तव आईआईटी आईएसएम धनबाद में पीएचडी के तीसरे वर्ष के शोधार्थी हैं। प्रोफेसर आरके उपाध्याय के मार्गदर्शन में वह संक्रामक बीमारियों की गणितीय मॉडलिंग पर काम कर रहे हैं। जापान की क्यूशू यूनिवर्सिटी में एक वर्ष के शोध कार्यक्रम के दौरान उनका फोकस हैजा जैसी बीमारी के प्रसार और उसे नियंत्रित करने में मानवीय व्यवहार की भूमिका को समझना होगा। धीरज के मुताबिक, किसी बीमारी को नियंत्रित करने के लिए केवल दवा या टीका विकसित करना पर्याप्त नहीं है।  यह समझना भी जरूरी है कि लोग टीका लगवाने, साफ पानी का इस्तेमाल करने और स्वच्छता अपनाने के प्रति कितना जागरूक हैं। इन तमाम पहलुओं का गणितीय मॉडल और उपलब्ध आंकड़ों के जरिए विश्लेषण किया जा सकता है। इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिल सकती है कि सरकारी नीतियों, टीकाकरण, जन-जागरूकता और संसाधनों पर खर्च का बेहतर तालमेल किस तरह बीमारी की रोकथाम में मददगार हो सकता है। 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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