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बंदे मातरम, आनंद मठ में कई रुपों में दिखेंगी शक्तिरूपेण मां दुर्गा खिदिरपुर यूनिवर्सल दुर्गोत्सव आयोजन में

खिदिरपुर यूनिवर्सल दुर्गोत्सव कमेटी अपनी शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रसिद्ध साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चटर्जी के ऐतिहासिक उपन्यास 'आनंदमठ' को अपनी पूजा का मुख्य थीम बना रही है। यह आयोजन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रेरणास्रोत 'वंदे मातरम' और संन्यासी विद्रोह के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को कलात्मक रूप से प्रदर्शित करेगा। इस अनूठी थीम आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति से स्थानीय पर्यटन और उत्सव अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आर्थिक धारा डेस्क
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1 अक्टूबर 2026 को 04:07 pm बजे
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बंदे मातरम, आनंद मठ में कई रुपों में दिखेंगी शक्तिरूपेण मां दुर्गा खिदिरपुर यूनिवर्सल दुर्गोत्सव आयोजन में
खिदिरपुर यूनिवर्सल दुर्गोत्सव कमेटी की निर्माणाधीन मूर्तियां|Arthik Dhara Photo

आसनसोल। खिदिरपुर यूनिवर्सल दुर्गोत्सव कमेटी ने इस बार अपना थीम साहित्य को बनाया है। साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चटर्जी को केंद्र में रखा गया है। कमेटी का दावा है कि उनकी साहित्यिक रचनाएं आने वाली कई पीढ़ियों तक काम की रहेंगी। इस पूजा की शुरुआत वर्ष 1927 में हुई थी। सौवीं सालगिरह को यादगार बनाने के लिए पूजा कॉन्सेप्ट है- मैंने सौ साल से जिसकी पूजा की है, उसे आनंदमठ में जाना है। पूजा पंडाल को आनंदमठ का रुप दिया जा रहा है। ऐतिहासिक नॉवेल 1882 में किताब के रूप में पब्लिश हुआ था। इसे भारतीय और बंगाली साहित्य के इतिहास में सबसे प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नॉवेल में से एक माना जाता है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों की मुख्य प्रेरणा वंदे मातरम गीत इसी नॉवेल का हिस्सा है, जिसे बाद में भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में पहचान मिली। यह नॉवेल मुख्य रूप से 1770 के ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शोषण के खिलाफ संन्यासी विद्रोह के बैकग्राउंड में लिखा गया है।

कमेटी सदस्यों का कहना है कि आनंदमठ के अलग-अलग दृश्यों, छवियों, प्रतीकों और विचारों के ज़रिए, वे उसी मां की छवि को खोजना चाहते हैं, जिसकी वे पिछले सौ सालों से दुर्गा के रूप में पूजा करते आ रहे हैं। इसलिए, पूजा परिसर को साहित्य, इतिहास, कला, भक्ति और मां की विचारधारा की एक दृश्यमान यात्रा के रूप में सजाया जाएगा। जैसे ही विज़िटर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में कदम रखेंगे, उन्हें मां के कई रूप दिखाई देंगे। सुंदरता से लेकर दर्द और संघर्ष की तस्वीरें भी इसमें कैद होंगी। 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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