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अभूतपूर्व पुलिसिया आतंक में बंगाल में उपचुनाव में हुआ मतदान: दीपांकर भट्‌टाचार्या

भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल उपचुनावों में अभूतपूर्व पुलिसिया आतंक का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र का संहार बताया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को रद्द करने की मांग की है। पार्टी और युवा संगठनों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

आर्थिक धारा डेस्क
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6 अक्टूबर 2026 को 10:57 pm बजे
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अभूतपूर्व पुलिसिया आतंक में बंगाल में उपचुनाव में हुआ मतदान: दीपांकर भट्‌टाचार्या
प्रेस कांफ्रेस को संबोधित करते दीपांकर भट्‌टाचार्या, नेहा बोरा |Arthik Dhara Photo

कोलकाता। भाकपा (माले, लिबरेशन) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने मंगलवार को कहा कि मंगलवार को राज्य में हुए दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदान पुलिसिया आतंक के रूप में सामने आया है। शहर के हरेकृष्ण कोनार भवन में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए लगातार सड़क पर आंदोलन करना होगा। अपने संघर्ष को तेज़ करना होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, CPI(ML) लिबरेशन के राज्य सचिव अभिजीत मजूमदार, वासुदेव बसु और पोलित ब्यूरो सदस्य कार्तिक पाल शामिल हुए।

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनावों का ज़िक्र करते हुए दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि वोटिंग की प्रक्रिया के दौरान अभूतपूर्व पुलिस का आतंक बना रहा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी पुलिस के इतने आतंक के बीच उपचुनाव होते नहीं देखा। SIR का इस्तेमाल शांतिपूर्ण तरीके से लोकतंत्र का संहार करने के लिए किया गया है। चुनाव एक मज़ाक बनकर रह गया है। दोनों उपचुनावों को लेकर सुबह से ही शिकायतें आने लगी थीं। वोटरों का आरोप था कि पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल चुनावी गड़बड़ी में मदद के लिए किया जा रहा था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने उनके इस्तीफ़े की मांग की। साथ ही उस कानून को रद्द करने की मांग की जिसके तहत उनकी नियुक्ति हुई थी। उन्होंने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को भी खत्म करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि दबाव में आकर बूथ लेवल अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे घर-घर जाकर मतदाता सूची से हटाए गए नामों को फिर से शामिल करें। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने बिहार में देखा था कि 17 प्रतिशत लोगों को गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें साफ़ हैं — ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देना चाहिए, SIR को वापस लिया जाना चाहिए और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द किया जाना चाहिए। बिहार और पश्चिम बंगाल में नए सिरे से चुनाव भी होने चाहिए।

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने घोषणा की कि छात्र और युवा 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग करेंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के लोगों से लोकतंत्र बचाने के आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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