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श्री श्री शारदा तीर्थ आश्रम में 18 भुजाओं वाली महालक्ष्मी की पूजा

मालदा के बामनगोला स्थित श्री श्री शारदा तीर्थ आश्रम में कोजागरी पूर्णिमा के अवसर पर 18 भुजाओं वाली महालक्ष्मी की अनूठी पूजा प्राचीन परंपरा के साथ की जाती है। वर्ष 1999 से चली आ रही इस 27 साल पुरानी परंपरा में देवी को शक्ति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में 16 अलग-अलग रीति-रिवाजों से पूजा जाता है। यह भव्य आयोजन स्थानीय संस्कृति और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्र के सांस्कृतिक पर्यटन और सामुदायिक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

आर्थिक धारा डेस्क
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25 अक्टूबर 2026 को 11:01 pm बजे
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श्री श्री शारदा तीर्थ आश्रम में 18 भुजाओं वाली महालक्ष्मी की पूजा
फाइल फोटो |Arthik Dhara Photo

मालदा। जिले के बामनगोला में धनदेवी लक्ष्मी न केवल धन और समृद्धि की देवी हैं, बल्कि महान शक्ति का प्रतीक भी हैं। बामनगोला ब्लॉक की जगदल्ला पंचायत के श्री श्री शारदा तीर्थ आश्रम में कोजागरी पूर्णिमा पर 18 भुजाओं वाली महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह पूजा वर्ष 1999 में आश्रम के संस्थापक स्वामी आत्मप्रेनंद महाराज की पहल पर शुरू की गई थी। आश्रम 1998 में स्थापित हुआ था। 27 सालों से इस देवी की पूजा प्राचीन परंपरा के अनुसार की जा रही है। इस महालक्ष्मी के 18 हाथों में अलग-अलग हथियार और निशान हैं। उनके एक हाथ में चक्र है, और दूसरे हाथ में त्रिशूल, गदा, धनुष-बाण, वज्र, कुल्हाड़ी, कमल, शंख और कई तरह के हथियार हैं। आश्रम में देवी की पूजा अलग-अलग रूपों में की जाती है यथा लक्ष्मी, दुर्गा और चंडी। देवी की 16 अलग-अलग रीति-रिवाजों से पूजा की जाती है। सुबह कपड़े, अलट, काजल, कंघी जैसी अलग-अलग चीज़ों से उनकी पूजा की जाती है। यज्ञ में 108 पान के पत्ते चढ़ाए जाते हैं। पांच तरह के तले हुए खाने, तीन तरह की सब्जियां, दालें और मिठाई खाई जाती है। 

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आर्थिक धारा संपादकीय डेस्क — वित्तीय बाजार, अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट जगत और राष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष, सटीक एवं विश्वसनीय विश्लेषण।

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